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क्या ऐसे ही डॉक्टरों को भगवान का रुप कहा जाता है? कहानी महाराष्ट्र के डॉ. रामचंद्र दांडेकर की।

हम सब ये सुनते आ रहे हैं,डॉक्टर भगवान का रुप होते हैं
इसे सच साबित कर रहे हैं, महाराष्ट्र के डॉ. रामचंद्र दांडेकर।

87 साल की उम्र में भी डॉ दांडेकर मरीजों को देखने के लिए
दूरदराज के इलाको में नंगे पांव साइकिल चला कर जाते हैं।
60 साल से डॉ रामचंद्र ऐसे ही लोगों की सेवा कर रहे हैं,
गरीबों का इलाज डॉ. साबह निशुल्क करते हैं।

डॉ दांडेकर ने नागपुर होम्पोपैथी कॉलेज से
1957-58 में डिप्लोमा हासिल की थी।
चंद्रपुर होम्पयोपैथी कॉलेज में लेक्चरर के पद पर भी रहे।
लोगों की सेवा करने के लिए ग्रामीण इलाकों में चले गए।

सभी लोग ‘डॉक्टर साहब मुल वाले’ कह कर बुलाते हैं।
वह प्रत्येक गांव में करीब 20 घरों में जाते हैं,गांव में
देर होने पर वहीं रुक जाते हैं।

कोरोना संकट के समय भी घर-घर जाकर इलाज
करते रहे। डॉ रामचंद्र दांडेकर का नि:स्वार्थ सेवाभाव
काबिले तारीफ है।

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